शृंगार भोग सेवा
सेवा का परिचय
शृंगार भोग सेवा ठाकुर श्री राधा सनेह बिहारी जी की दैनिक आराधना का एक अत्यंत मनोहर एवं भक्तिपूर्ण चरण है। इस सेवा में ठाकुर जी का अलंकरण, वस्त्र-परिवर्तन, पुष्प-सज्जा और उसके उपरांत विशेष भोग का अर्पण किया जाता है।
यह सेवा भक्त के प्रेम और सौंदर्य-भाव का प्रत्यक्ष प्रतीक है — जहाँ ठाकुर जी के हर अंग में भक्ति और माधुर्य झलकता है।
सेवा का महत्व
शृंगार का अर्थ केवल बाहरी अलंकरण नहीं, बल्कि मन, भावना और समर्पण की अभिव्यक्ति है। जब भक्त अपने भावों को पुष्प, वस्त्र और गंध के रूप में ठाकुर जी को अर्पित करता है, तो वह अपने जीवन की सुंदरता ठाकुर जी के चरणों में समर्पित करता है। शृंगार भोग सेवा से भक्त के हृदय में आनंद, सौंदर्य और शांति का संयोग स्थापित होता है।
जो ठाकुर जी के शृंगार में भाव अर्पित करता है, उसे जीवन में सौंदर्य और भक्ति दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
अर्पण के प्रकार
- वस्त्र शृंगार: रेशमी, पुष्प-डिज़ाइन या जरीदार परिधान।
- आभूषण शृंगार: सोने, चाँदी या कृत्रिम आभूषणों से अलंकरण।
- पुष्प शृंगार: ताज़े फूलों की मालाएँ और पुष्प-चंदन तिलक।
- इत्र और चंदन अर्पण: दिव्य सुगंध के साथ अलंकरण पूर्ण किया जाता है।
सेवा प्रक्रिया
- भक्त वेबसाइट या मंदिर कार्यालय में सेवा आरक्षित करें।
- मंदिर प्रबंधन द्वारा तय तिथि पर ठाकुर जी का शृंगार सम्पन्न होगा।
- वस्त्र, पुष्प और इत्र चयन भक्त की ओर से सुझाए जा सकते हैं।
- सेवा के उपरांत ठाकुर जी को विशेष भोग अर्पित किया जाएगा।
- सेवा पूर्ण होने पर भक्त को फोटो/वीडियो लिंक व्हाट्सएप द्वारा प्राप्त होगा।
नियम एवं दिशा–निर्देश
- वस्त्र और सामग्री नवीन एवं शुद्ध होनी चाहिए।
- अर्पण हेतु फूल और इत्र केवल प्राकृतिक स्रोतों से हों।
- यदि भक्त विशेष अवसर पर शृंगार सेवा कराना चाहते हैं (जैसे जन्मदिन, वर्षगाँठ आदि), तो कम से कम 48 घंटे पूर्व सूचना आवश्यक है।
- मंदिर के प्रबंधन द्वारा अनुमोदन के बाद ही सामग्री स्वीकार की जाएगी।
सेवा बुकिंग हेतु आवश्यक विवरण
- भक्त का नाम
- गोत्र
- नक्षत्र / जन्म राशि (यदि उपलब्ध हो)
- सेवा किसके नाम से करवाई जा रही है
- विशेष अवसर (जैसे जन्मदिन, विवाह वर्षगाँठ, आदि)
- निवास स्थान
- ईमेल व मोबाइल नंबर
- सेवा की तिथि और समय स्लॉट
आध्यात्मिक संदेश
शृंगार में केवल फूल या वस्त्र नहीं, भक्त का भाव सजा होता है। जब प्रेम से अर्पण होता है, तब ठाकुर जी की मुस्कान ही उसका प्रसाद बन जाती है।