उषापान भोग सेवा ठाकुर श्री राधा सनेह बिहारी जी की दैनिक आराधना का प्रथम और अत्यंत शुभ चरण है। यह सेवा प्रातःकाल के मंगल समय में सम्पन्न होती है, जब ठाकुर जी को नींद से जागृत कर उनके चरणों में स्नेहपूर्ण भोग अर्पित किया जाता है। यह सेवा भक्त के जीवन में नई ऊर्जा, शांति और शुभता का आरंभ कराती है।
भक्त इस सेवा के माध्यम से अपने दिन की शुरुआत ठाकुर जी की कृपा से करते हैं — मानो प्रभात की पहली किरण के साथ ठाकुर जी का आशीर्वाद घर में प्रवेश करता हो।
उषापान का अर्थ है “प्रभात का भोग” — यह भक्ति का प्रारंभिक संकल्प है। इस सेवा से भक्त दिनभर ठाकुर जी के स्मरण में स्थिर रहता है। जैसे सूर्योदय प्रकृति को प्रकाशित करता है, वैसे ही ठाकुर जी का उषापान भक्त के जीवन को प्रकाशित करता है।
जिस घर में प्रभात होते ही ठाकुर जी का नाम लिया जाता है, वहाँ अंधकार नहीं टिकता — केवल सनेह की ज्योति रहती है।
उषापान सेवा केवल सुबह का भोग नहीं, यह प्रभात की पहली प्रार्थना है — जिसमें भक्त ठाकुर जी को अपने दिन का स्वामी बना देता है।
विशेष पर्वों या जन्मदिन, वर्षगाँठ आदि पर प्रातःकालीन विशेष उषापान भोग सेवा भी उपलब्ध है।