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दैनिक भोग–राग सेवा

दैनिक भोग–राग सेवा

सेवा का परिचय

दैनिक भोग–राग सेवा ठाकुर श्री राधा सनेह बिहारी जी की नित्य आराधना का प्रमुख अंग है। इस सेवा के अंतर्गत भक्त दिनभर के विभिन्न समयों पर ठाकुर जी को विविध भोग अर्पित करते हैं — मंगला भोग से लेकर शयन भोग तक। यह सेवा भक्त के जीवन को भक्ति के अनुशासन, समयबद्धता और समर्पण से जोड़ती है।

भोग अर्पण केवल अन्न का अर्पण नहीं, बल्कि प्रेम, श्रम और श्रद्धा का समर्पण है, जिससे भक्त ठाकुर जी की दिव्य सेवा का सहभागी बनता है।

सेवा का महत्व

भोग सेवा से ठाकुर जी को प्रसन्नता और भक्त को आंतरिक तृप्ति प्राप्त होती है। दिन के प्रत्येक भोग में भक्त अपने जीवन का एक भाग समर्पित करता है — सुबह की आराधना से लेकर रात के विश्राम तक। यह सेवा भक्त को “सतत स्मरण” का भाव देती है, जिससे उसका प्रत्येक कर्म भक्ति में परिवर्तित हो जाता है।

भक्त का प्रत्येक अन्न कण, जब ठाकुर जी के चरणों में समर्पित होता है, तब वही भोजन प्रसाद बनकर जीवन का अमृत बन जाता है।

अर्पण के प्रकार

  • मंगला भोग: प्रातःकालीन भोग – दूध, माखन-मिश्री, फल।
  • राजभोग: मध्याह्न भोग – पूर्ण भोजन, व्यंजन, मिष्ठान्न और फल।
  • संध्या भोग: हल्का स्निग्ध आहार, फलों या पकवानों के साथ।
  • शयन भोग: विश्राम से पूर्व हल्का दूध या मिष्ठान्न अर्पण।

हर समय का भोग ठाकुर जी की दिनचर्या का अंग है, जो भक्ति को दिनभर जीवंत बनाए रखता है।

सेवा प्रक्रिया

  1. भक्त वेबसाइट या मंदिर कार्यालय से सेवा बुक करें।
  2. सेवा की तिथि और भोग प्रकार का चयन करें (मंगला, राजभोग, संध्या, शयन)।
  3. भुगतान और संकल्प फॉर्म पूर्ण होने के बाद सेवा की पुष्टि प्राप्त करें।
  4. मंदिर में निर्धारित समय पर ठाकुर जी को भोग अर्पित किया जाएगा।
  5. भक्त को व्हाट्सएप/ईमेल द्वारा सेवा की रिपोर्ट व फोटो भेजी जाएगी।

नियम एवं दिशा–निर्देश

  • सभी व्यंजन शुद्ध, सात्त्विक और ताज़े होने चाहिए।
  • तामसिक पदार्थ (लहसुन, प्याज आदि) का प्रयोग वर्जित है।
  • यदि भक्त भोग सामग्री भेजना चाहें, तो मंदिर से पूर्व अनुमति आवश्यक है।
  • भोग के समय और प्रकार में बदलाव केवल प्रबंधन की अनुमति से ही होगा।

सेवा बुकिंग हेतु आवश्यक विवरण

  • भक्त का नाम
  • गोत्र
  • नक्षत्र / जन्म राशि (यदि उपलब्ध हो)
  • सेवा किसके नाम से करवाई जा रही है
  • विशेष अवसर
  • निवास स्थान
  • ईमेल व मोबाइल नंबर
  • भोग का प्रकार और समय

आध्यात्मिक संदेश

जब भक्त का अन्न ठाकुर जी के भोग में लग जाता है, तब वही अन्न जीवन को प्रसाद बना देता है। भोग का अर्थ तृप्ति नहीं — समर्पण है।


हमारे पंडित जी से संपर्क कैसे करें?

किसी विशेष अवसर (जैसे जन्मदिन, वर्षगाँठ या पुण्यतिथि) पर विशेष भोग–सेवा हेतु भक्त अग्रिम रूप से सूचना देकर सेवा आरक्षित कर सकते हैं।

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