दैनिक भोग–राग सेवा ठाकुर श्री राधा सनेह बिहारी जी की नित्य आराधना का प्रमुख अंग है। इस सेवा के अंतर्गत भक्त दिनभर के विभिन्न समयों पर ठाकुर जी को विविध भोग अर्पित करते हैं — मंगला भोग से लेकर शयन भोग तक। यह सेवा भक्त के जीवन को भक्ति के अनुशासन, समयबद्धता और समर्पण से जोड़ती है।
भोग अर्पण केवल अन्न का अर्पण नहीं, बल्कि प्रेम, श्रम और श्रद्धा का समर्पण है, जिससे भक्त ठाकुर जी की दिव्य सेवा का सहभागी बनता है।
भोग सेवा से ठाकुर जी को प्रसन्नता और भक्त को आंतरिक तृप्ति प्राप्त होती है। दिन के प्रत्येक भोग में भक्त अपने जीवन का एक भाग समर्पित करता है — सुबह की आराधना से लेकर रात के विश्राम तक। यह सेवा भक्त को “सतत स्मरण” का भाव देती है, जिससे उसका प्रत्येक कर्म भक्ति में परिवर्तित हो जाता है।
भक्त का प्रत्येक अन्न कण, जब ठाकुर जी के चरणों में समर्पित होता है, तब वही भोजन प्रसाद बनकर जीवन का अमृत बन जाता है।
हर समय का भोग ठाकुर जी की दिनचर्या का अंग है, जो भक्ति को दिनभर जीवंत बनाए रखता है।
जब भक्त का अन्न ठाकुर जी के भोग में लग जाता है, तब वही अन्न जीवन को प्रसाद बना देता है। भोग का अर्थ तृप्ति नहीं — समर्पण है।
किसी विशेष अवसर (जैसे जन्मदिन, वर्षगाँठ या पुण्यतिथि) पर विशेष भोग–सेवा हेतु भक्त अग्रिम रूप से सूचना देकर सेवा आरक्षित कर सकते हैं।