इत्र–तुलसी–चंदन सेवा
सेवा का परिचय
इत्र–तुलसी–चंदन सेवा ठाकुर श्री राधा सनेह बिहारी जी के शृंगार और पूजन का अत्यंत पवित्र अंग है। इस सेवा के माध्यम से भक्त ठाकुर जी को चंदन, इत्र और तुलसीदल अर्पित करते हैं, जो भक्ति, शीतलता और पवित्रता का प्रतीक है।
चंदन की शीतलता, तुलसी की सुगंध और इत्र की मधुरता मिलकर ठाकुर जी के चरणों में भक्ति का स्नेहरस प्रवाहित करती है। यह सेवा भक्त के मन और वातावरण दोनों को दिव्यता से भर देती है।
सेवा का महत्व
यह सेवा केवल बाहरी अर्पण नहीं, बल्कि आंतरिक भक्ति की अभिव्यक्ति है। भक्त द्वारा अर्पित प्रत्येक तुलसीदल, चंदन लेप या इत्र की बूंद ठाकुर जी के चरणों तक पहुँचकर उसका जीवन पवित्र कर देती है। जहाँ चंदन की शीतलता होती है, वहाँ क्रोध नहीं — केवल भक्ति और सनेह का भाव रहता है।
अर्पण के प्रकार
- चंदन लेपन: ठाकुर जी के मस्तक, चरण एवं हृदय पर शीतल चंदन का अर्पण।
- तुलसीदल अर्पण: तुलसी, जिसे श्रीहरि अत्यंत प्रिय मानते हैं, प्रत्येक पूजन में अनिवार्य है।
- इत्र अभिषेक: गुलाब, केवड़ा, चंपा जैसे पुष्प-इत्र से ठाकुर जी को सुगंधित किया जाता है।
सेवा प्रक्रिया
- श्रद्धालु वेबसाइट या मंदिर में सेवा बुक करें।
- तिथि और समय का निर्धारण मंदिर प्रबंधन द्वारा किया जाएगा।
- सेवा दिवस पर ठाकुर जी के विग्रह पर चंदन, इत्र एवं तुलसीदल अर्पित किए जाएंगे।
- भक्त को उसकी सेवा की पुष्ट जानकारी व फोटो/लाइव लिंक व्हाट्सएप पर प्राप्त होगी।
नियम एवं दिशा–निर्देश
- केवल शुद्ध प्राकृतिक चंदन और इत्र का प्रयोग किया जाएगा।
- तुलसीदल ताज़ा एवं स्वच्छ जल से धुला होना चाहिए।
- सेवा का संकल्प फॉर्म पूर्ण रूप से भरना अनिवार्य है।
- यदि भक्त स्वयं सामग्री भेजना चाहें, तो मंदिर प्रबंधन से अनुमति आवश्यक होगी।
सेवा बुकिंग हेतु आवश्यक विवरण
- Seva krvaane vaale ka naam का नाम
- गोत्र
- / जन्म राशि (यदि उपलब्ध हो)
- सेवा किसके नाम से करवाई जा रही है/ swam
- विशेष अवसर (जन्मदिन, पुण्यतिथि, वर्षगाँठ आदि)
- वर्तमान निवास स्थान
- ईमेल व मोबाइल नंबर
- Whataap number or same
- तिथि और समय स्लॉट
आध्यात्मिक संदेश
चंदन की शीतलता, तुलसी की पवित्रता और इत्र की सुगंध – यही भक्ति की तीन धाराएँ हैं, जो ठाकुर जी के चरणों से मिलकर सनेह का सागर बन जाती हैं।