राजभोग सेवा ठाकुर श्री राधा सनेह बिहारी जी के दिव्य भोगों में सबसे भव्य और प्रमुख सेवा है। इस सेवा में ठाकुर जी को विविध मिष्टान्न, व्यंजन और फल-भोग अर्पित किए जाते हैं, जो भक्ति, समृद्धि और आनंद का प्रतीक है। राजभोग केवल भोजन नहीं — यह भक्त के प्रेम, समर्पण और श्रद्धा का उत्सव है।
मंदिर में राजभोग सेवा विशेष रूप से मध्याह्न काल में सम्पन्न होती है, जहाँ ठाकुर जी को भव्य सजावट, आरती और संकीर्तन के साथ राजसी भोग समर्पित किया जाता है।
राजभोग सेवा का अर्थ है – अपने जीवन का सर्वोत्तम अर्पित करना। यह सेवा भक्त को “दाता नहीं, दास” बनने का भाव देती है। भक्त ठाकुर जी को भोजन नहीं, बल्कि अपने प्रेम और परिश्रम का अंश समर्पित करता है। भोग लगने के बाद वह प्रसाद रूप में सबके लिए कृपा का माध्यम बन जाता है।
जब ठाकुर जी के चरणों में भोजन पहुँचता है, तब घर-घर में कृपा का अन्न बरसता है।
राजभोग सेवा वह क्षण है जब भक्त अपने जीवन का सर्वोत्तम ठाकुर जी के चरणों में रखता है। अन्न अर्पण नहीं — यह आत्मा का समर्पण है।
भक्त चाहें तो अपने भोग की सूची या विशेष सामग्री मंदिर को अग्रिम भेज सकते हैं।