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राजभोग सेवा

राजभोग सेवा

सेवा का परिचय

राजभोग सेवा ठाकुर श्री राधा सनेह बिहारी जी के दिव्य भोगों में सबसे भव्य और प्रमुख सेवा है। इस सेवा में ठाकुर जी को विविध मिष्टान्न, व्यंजन और फल-भोग अर्पित किए जाते हैं, जो भक्ति, समृद्धि और आनंद का प्रतीक है। राजभोग केवल भोजन नहीं — यह भक्त के प्रेम, समर्पण और श्रद्धा का उत्सव है।

मंदिर में राजभोग सेवा विशेष रूप से मध्याह्न काल में सम्पन्न होती है, जहाँ ठाकुर जी को भव्य सजावट, आरती और संकीर्तन के साथ राजसी भोग समर्पित किया जाता है।

सेवा का महत्व

राजभोग सेवा का अर्थ है – अपने जीवन का सर्वोत्तम अर्पित करना। यह सेवा भक्त को “दाता नहीं, दास” बनने का भाव देती है। भक्त ठाकुर जी को भोजन नहीं, बल्कि अपने प्रेम और परिश्रम का अंश समर्पित करता है। भोग लगने के बाद वह प्रसाद रूप में सबके लिए कृपा का माध्यम बन जाता है।

जब ठाकुर जी के चरणों में भोजन पहुँचता है, तब घर-घर में कृपा का अन्न बरसता है।

अर्पण के प्रकार

  • मिष्टान्न भोग: खीर, हलवा, बर्फी, लड्डू, रसगुल्ला आदि।
  • मुख्य व्यंजन भोग: पूरी, सब्जी, दाल, चावल, पनीर, मखाना आदि।
  • फलाहार भोग: मौसमी फल और सूखे मेवे।
  • विशेष पर्व भोग: त्योहारों पर 21 या 56 प्रकार के व्यंजन।

सेवा प्रक्रिया

  1. भक्त वेबसाइट या मंदिर कार्यालय में सेवा बुक करें।
  2. तिथि और भोग प्रकार (सामान्य / विशेष) चुनें।
  3. भुगतान और संकल्प फॉर्म पूर्ण करें।
  4. सेवा के दिन मंदिर में राजभोग तैयार कर ठाकुर जी को अर्पित किया जाएगा।
  5. अर्पण के उपरांत प्रसाद भक्त को डाक या मंदिर से प्राप्त हो सकता है।

नियम एवं दिशा–निर्देश

  • सभी सामग्री सात्त्विक और ताज़ी होनी चाहिए।
  • किसी भी भोग में तामसिक तत्व (लहसुन, प्याज आदि) का प्रयोग वर्जित है।
  • यदि भक्त विशेष प्रसाद बनवाना चाहें तो मंदिर प्रबंधन से पूर्व अनुमति आवश्यक है।
  • त्योहारों या विशेष आयोजनों पर बुकिंग अग्रिम करनी होगी।

सेवा बुकिंग हेतु आवश्यक विवरण

  • भक्त का नाम
  • गोत्र
  • नक्षत्र / जन्म राशि (यदि उपलब्ध हो)
  • सेवा किसके नाम से करवाई जा रही है
  • विशेष अवसर (जैसे जन्मदिन, पुण्यतिथि, पर्व आदि)
  • निवास स्थान
  • ईमेल व मोबाइल नंबर
  • सेवा तिथि और भोग का प्रकार

आध्यात्मिक संदेश

राजभोग सेवा वह क्षण है जब भक्त अपने जीवन का सर्वोत्तम ठाकुर जी के चरणों में रखता है। अन्न अर्पण नहीं — यह आत्मा का समर्पण है।


हमारे पंडित जी से संपर्क कैसे करें?

भक्त चाहें तो अपने भोग की सूची या विशेष सामग्री मंदिर को अग्रिम भेज सकते हैं।

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