भंडारा सेवा ठाकुर श्री राधा सनेह बिहारी जी की कृपा को समाज में बाँटने की सबसे पवित्र परंपराओं में से एक है। इस सेवा के माध्यम से भक्त मंदिर परिसर या निर्धारित स्थल पर संतों, ब्राह्मणों, भक्तों और आगंतुकों के लिए सामूहिक भोजन वितरण का आयोजन करते हैं।
भंडारा सेवा दान, विनम्रता और समानता का सजीव प्रतीक है — जहाँ ठाकुर जी का प्रसाद सबके लिए समान भाव से परोसा जाता है।
यह सेवा केवल भोजन का आयोजन नहीं, बल्कि प्रेम, सनेह और कृतज्ञता का उत्सव है।
भंडारा सेवा को “अन्नदान” कहा गया है — जो श्रेष्ठतम दान है। इस सेवा से भक्त अपने जीवन के अभावों को समाप्त कर समृद्धि और शांति का अनुभव करता है भोजन के माध्यम से ठाकुर जी का प्रसाद जब भक्तों तक पहुँचता है, तो वह उनके जीवन में कृपा, संतोष और भक्ति का प्रसार करता है।
अन्नदान केवल शरीर को नहीं, आत्मा को भी तृप्त करता है। जहाँ प्रसाद बाँटा जाता है, वहाँ सनेह की धारा बहती है।
भंडारा सेवा में भक्त का हाथ नहीं, ठाकुर जी का आशीर्वाद चलता है। जो दूसरों को भोजन कराता है, उसके जीवन में कभी अभाव नहीं रहता — केवल सनेह और संतोष रहता है।
भक्त चाहें तो पूर्ण भंडारा प्रायोजन या सहयोग राशि के रूप में भाग ले सकते हैं। मंदिर टीम द्वारा सभी व्यवस्थाएँ पारदर्शी रूप से की जाती हैं।